डॉलर के आगे पस्त हुआ भारत का रुपया, 90.64 के निचले स्तर पर रिकॉर्ड गिरावट

भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 5.5% कमजोर हुआ है। सोमवार को रुपया 90.6475 पर पहुंचा, जो 12 दिसंबर के अपने पिछले सर्वकालिक निचले स्तर 90.55 से भी नीचे है। इस गिरावट के पीछे अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में चल रही गतिरोध और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली प्रमुख कारण हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लोकल इक्विटी और बॉन्ड बाजार से विदेशी निवेशकों ने 2025 में अब तक 18 बिलियन डॉलर से अधिक के स्टॉक बेचे हैं। इसके अलावा दिसंबर में 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा के बॉन्ड भी बिके हैं, जिससे रुपया दबाव में रहा। यह बिकवाली भारत को पोर्टफोलियो आउटफ्लो के लिहाज से सबसे प्रभावित बाजारों में से एक बना चुकी है।
इसके अलावा, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक के भारी टैरिफ ने भारत के सबसे बड़े बाजार में एक्सपोर्ट को नुकसान पहुंचाया है। इस वजह से विदेशी निवेशकों की रुचि कम हुई है। मुंबई के एक बैंक के ट्रेडर का कहना है कि भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार की यह टिप्पणी कि ट्रेड डील मार्च तक हो सकती है, ने बाजार की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस साल के अंत तक ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की संभावना कम है। नतीजतन, व्यापार के मुद्दे पर नकारात्मक माहौल के कारण रुपया डॉलर की कमजोरी का लाभ नहीं उठा पा रहा है।
फॉरेक्स एडवाइजरी फर्म IFA ग्लोबल के अनुसार, मध्यम अवधि में रुपया कमजोर प्रदर्शन जारी रख सकता है। आने वाले छह हफ्तों में रुपया 89.60 से 90.60 के बीच उतार-चढ़ाव कर सकता है।
क्या रुपया और गिरावट की नई सीमा छुएगा? आने वाले हफ्ते इस सवाल का जवाब देंगे।